यह अत्यंत हर्ष व गौरव की बात है कि महर्षि अरविन्द के कथन-"भारत एक दिन फिर से जगद्गुरु बनेगा" की दिशा में हमारा भारत देश सन् 2000 से अग्रसर हो चला है एवम् इसकी विराट झलक झांकी या यूँ कहें तो योग के माध्यम से एक प्रतिनिधित्व आगामी 21 जून 2015 को सम्पूर्ण विश्व, अन्तराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में देखेगा। सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति पूर्णतः योगमय ही है दिन से लेकर रात तक पूरा दिन सम्पूर्ण रूप से व्यक्ति योग ही करता है अब जरुरत है तो अपने आप को इसके प्रति जागरूक बनाने की एवम् इसके व्यवहारिकता को समझने की अतः आइये आज 1 जून से 21 जून तक हम एक लघु संकल्प ले कि योग के विषय में अपने आप को जागरूक बनाएं उसे जीवन में अपनाएं ताकि आगामी 21 जून के योग दिवस को हम सब उसकी व्यवहारिकता व वास्तविकता की दृष्टि से सार्थक कर पायें इतना ही नहीं उसके बाद भी सम्पूर्ण जीवन को व्यवहारिक रूप से योगमय बनाने का उत्कृष्ठ प्रयास करें। समस्त भारतवासी ही मिलकर बनायेंगे भारत को जगद्गुरु जिसका एक मात्र आधार है "हम बदलेंगे-युग बदलेगा, हम सुधरेंगे-युग सुधरेगा"-

1. योग एक अनुशासन है जिसके माध्यम से हम अपने सम्पूर्ण जीवन को सरल, सहज, शान्त व उत्कृष्ठ बनाने का अभ्यास करते है।
2. योग संस्कृत के युज् धातु से बना है जिसका अर्थ ही होता है जुड़ना।अतः योग हमें आपने जीवन की गहराई से ,उसकी वास्तविकता से, उसकी मौलिकता से तथा उसकी यथार्थता से विभिन्न माध्यमों द्वारा जुड़ना सिखाता है ताकि ईश्वर द्वारा दिया गया यह जीवन हम सफल बनाने के साथ-साथ सार्थक भी कर पाएं।
3. योग एवम् ॐ अपने आप में स्वतंत्र है किसी भी धर्म/जाति/वर्ग/संप्रदाय/समुदाय से इसका विशेष रूप से एकाधिकार नहीं है क्योकि योग सम्पूर्णता, एकता व उत्कृष्ठता का सन्देश देता है।
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