योग एक प्रकृति प्रेम-(विश्व पर्यावरण दिवस पर संदर्भित)
* योग का अर्थ है जुड़ना व कहा यह भी गया है आत्मा व परमात्मा का मिलन योग है और यह तभी संभव है जब हम परमात्मा से प्रेम करेंगे, उनके गुणों को आत्मसात करने का अभ्यास करेंगे।
* इसी सन्दर्भ में प्रकृति के प्रति लगाव, प्रकृति से प्रेम भी एक योग है। परोक्ष रूप में यह प्रकृति ही परमात्मा का स्वरूप है क्योंकि हमारा जीवन प्रकृति की ही देन है।
* वर्तमान जीवन में विकास की दौड़ मेंबकमाने की होड़ लगी है परंतु साथ साथ जीवन जीने की कला भी भूलते जा रहे व इस भूल से प्रकृति का अति शोषण हो रहा एवम् प्रकृति के पोषण में कमी। ऐसे में योग ही ऐसा माध्यम है जो जीवन के होड़ और दौड़ को सही रास्ते में लेजाने का मार्गदर्शन करता है।
* प्रकृति ही मनुष्य जाति के लिए जीने के साधन जुटाती रही है एवम् मनुष्य जाति का पालन करने के लिए पृथ्वी पर साफ पानी, साफ हवा और वनस्पति तथा खनिज उपलब्ध कराती है।
* आज वही प्रकृति और पर्यावरण खतरे में है। वस्तुओं के अंधाधुंध उपभोग और उत्पादन के हमारे वर्त्तमान तौर-तरीकों से पर्यावरण नष्ट हो रहा है, जीव लुप्त होते जा रहे हैं। मनुष्य जाति में आपस में प्रतिद्वंदिता छिड़ गई है। शक्तिशाली गुट शक्तिहीन गुटों को नष्ट करने पर तुले हुए हैं। अमीर गुट गरीब गुटों के दुश्मन हो गए हैं। उनके बीच की दूरी बढ़ती जा रही है। गरीब विकास का हिस्सा नहीं बन पा रहे हैं। अमीरी और गरीबी के इस टकराव में सारे अधिकार अमीरों के पास सुरक्षित हो गए हैं। गरीब अधिकारहीन हैं। इससे जो सामाजिक बुराइयाँ पैदा हुईं हैं वे ही पर्यावरण तथा मनुष्य जाति (समाज)के लिए खतरा बन गईं हैं। ये सामाजिक बुराइयाँ हैं: ईर्ष्या, द्वेष, राग, अन्याय, गरीबी, अशिक्षा तथा हिंसा। इन बुराइयों को समाप्त करने की आवश्यकता है। यही सम्पूर्ण रूप से पर्यावरण प्रदूषण है।
* इस प्रदूषण को दूर करने के लिए प्रकृति समाज के प्रति कर्तव्यों का पालन करना होगा।
* जैसे-
1. आवश्यक्ता अनुसार ही वस्तुओं का उपयोग करना। आवश्यक्ता कम करना व परिस्थितियों से तालमेल बिठाना।
2. कूड़ा कचरा सही जगह पर फेंकना। व सड़क/रेल/बस/अन्य साधनों में गंदगी नहीं करना।
3. बिजली/पानी को बर्बाद न करना व इनके संरक्षण हेतु प्रेरित करना।
4. वृक्षारोपण का कार्य करना। कम से कम अपने जन्मदिन पर एक पेड़ अवश्य लगाना।
5. संभवतः यज्ञ द्वारा वायु प्रदूषण को रोकना। कई पर्वों त्योहारों को ईको फ्रेंडली रूप से मनाना विशेषकर दीपावली, होली नया साल।
6. अच्छा आचरण, वाणी में सौम्यता रखना, सम्मान पूर्वक व्यवहार, भेदभाव, ईर्ष्या, द्वेष से परे होना।
7. प्रकृति को प्रदूषण मुक्त व समाज के उन्नति हेतु जागरूकता फैलाना।
8. एकता व समता का भाव जागृत करना।
..और भी अन्य पहल अपने स्तर पर किये जा सकते है परंतु इन सबके लिए आत्म निरिक्षण व आत्म सुधार सैर्वोपरि आवश्यक्ता है।
जो इस ओर अग्रसर है और प्रयासरत है वे ईश्वर दृष्टि से प्रशंसा के पात्र है। अतएव इस प्रकार का योग ही प्रकृति प्रेम परमात्म प्रेम है।
-‪#‎vedprakashthawait‬
www.facebook.com/vpthawait (link is external)
- अन्तराष्ट्रीय योग दिवस विशेष(21 जून 2015)
। विश्व पर्यावरण दिवस पर शुभकामनायें ।