योग व मानसिक परिप्रेक्ष्य-
* मानसिक परिप्रेक्ष्य में योग का तात्पर्य मानसिक स्वास्थ्य से है अर्थान् मानसिक रूप से स्वस्थ होना, हमारे मानसिक व्यवहार व आचरण का सही निर्धारण।
* मानसिक स्वास्थ्य को सही रखने के लिए मुख्य रूप से सुखासन के साथ ध्यान व प्राणायाम का अभ्यास किया जाता है एवम् इसके साथ- साथ जप, स्वाध्याय व सत्संग भी दैनिक जीवन में किया जाता है।
* महर्षि पतंजलि द्वारा कहा गया है 'चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है'। सरल शब्दों में कहा जाय तो मन की चंचलता को Balance करना, बुरी वृत्तियों का अच्छी वृत्तियों में परिवर्तन , अपने मन को परिष्कृत करने का अभ्यास, मन की सबलता को बढ़ाना, मन की ऊर्जाओं को सही दिशा देना।
* मन की पवित्रता/शुद्धता ही इसका उद्देश्य है।
* दिन से लेकर रात तक मनुष्य अपने कर्मों में रत रहता है ऐसे में सामान्य रूप से, उसे बहुत से परिस्थियों/घटनाओं/व्यवहारों का सामना करना पड़ता है तथा देश,काल व परिस्थियों के अनुसार कब/क्या/कैसे सोचना है,करना है निर्णय लेना है यह सब मानसिक रूप से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति की मानसिकता अवस्था पर ही यह निर्भर है ऐसे में मानसिक रूप से सबल होना आवश्यक ही है।
* कुछ अभ्यासों में जैसे भ्रामरी प्राणायाम व नाड़ीशोधन प्राणायाम प्रतिदिन अभ्यास किया जा सकता है। साथ ही साथ सूर्य(सविता देवता)प्रातःकाल का ध्यान, उच्च विचारों में रमण करने के ध्यान का अभ्यास किया जा सकता है।
* सामान्य दिनचर्या में स्वाध्याय(अच्छे विचारों का अध्ययन, चिंतन व मनन एवम् उसका आचरण में अभ्यास) को शामिल किया जान चाहिए। अन्य रूप से जप व सत्संग भी दैनिक जीवन में शामिल किये जा सकते है।
* मन को कुविचारों व दुर्भावनाओं (ईर्ष्या, द्वेष, राग, काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, स्वार्थ) से बचाना है एवम् भाव- संवेदनाओं का जागरण करना है। मन की ऊर्जा को सार्थक दिशा देनी है, मानसिक आचरण व्यवहार को सही रखना है जिसके लिए स्वाध्याय, ध्यान व प्राणायाम द्वारा योगाभ्यास को जीवन का अंग बनाएं। यही इसका उद्देश्य है।
* सामान्यतः किसी एक अभ्यास को ही चुन लें व नियमितता के साथ उसका अभ्यास करना चाहिए। अंततः सारे अभ्यासों का एक ही मर्म निकलता है कि अपनी जीवन की सम्पूर्ण ऊर्जाओं को किस ओर हमें लेजाना है चेतना की उत्कृष्ठता/ की ओर या निम्नता/निकृष्ठता की ओर।
Choice is Yours...
कोठरी मन की सदा रख साफ़ बन्दे कौन जाने कब स्वयं प्रभु आन बैठे।
दृष्टिकोण यदि बदला जाये तो बदल सकता है इंसान ।
-‪#‎vedprakashthawait‬
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- अन्तराष्ट्रीय योग दिवस विशेष(21 जून 2015)